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Friday, 6 December 2013

परीक्षा में सुधार के लिए एमडीयू ने शुरू की तैयारी

** बार-बार परिणाम के बाद छात्र के साथ कॉलेज प्रबंधन को भी झेलनी पड़ती है परेशानी 
फरीदाबाद : सबकुछ ठीकठाक रहा तो आगे से परीक्षा परिणाम संबंधित गलती से छात्र और कॉलेज प्रबंधन को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी द्वारा इसे लेकर कई परिवर्तन करने का निर्णय लिया गया है। ताकि किसी तरह की चूक परिणाम को लेकर न हो। 
परीक्षा परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र किसी न किसी विषय में फेल हो जाते हैं। इतना ही नहीं परीक्षा के दौरान कभी आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न पत्र भी आ जाता है। ऐसा कई बार हुआ है। कभी सेकेंड में फस्र्ट सेमेस्टर का पेपर थमा दिया जाता है। सभी गड़बडिय़ों पर रोक लगाने के लिए कुछ समय पहले यूनिवर्सिटी स्तर पर कमेटी गठित की गई थी। हाल ही में यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल कमेटी की बैठक में परीक्षा परिणाम को दुरुस्त करने के लिए अहम कदम उठाए गए हैं। इसमें उत्तरपुस्तिका के साथ ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्नाइजेशन (ओएमआर) शीट देने का निर्णय प्रमुख है। मूल्यांकन के दौरान किसी प्रकार की खामी नहीं रहेगी। परिणाम भी शीघ्र निकलेगा। इसे दिसंबर से आयोजित हो रही है इंजीनियरिंग विभाग की परीक्षा में लागू कर दिया गया है। अन्य परीक्षाओं में यह जून में लागू कर दिया जाएगा। शिक्षकों को भी आंसरशीट जांचने के बाद ओएमआर सीट में उसके अंक भरने होंगे। जिसके बाद उसकी स्क्रीनिंग कर रिजल्ट तैयार किया जाएगा। इससे अंक छूटने की संभावना खत्म हो जाएगी। 
परीक्षा नियंत्रक बीएस सिंधु के अनुसार इसे लागू करने पर मुहर लग गई है। इससे काफी सहूलियत होगी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व जिला मीडिया प्रभारी सचिन माडोतिया ने बताया कि परीक्षा परिणाम गलत आने से छात्रों की परेशानी बढ़ जाती है। इसमें सुधार के लिए परिषद ने जिले में आंदोलन चलाया था। 
परीक्षा संबंधित हुई गलतियां 
  • हाल ही में एमबीए की परीक्षा के दौरान एचआर के बदले मिला फाइनेंस का पेपर 
  • पिछले साल बीकॉम छठे सेमेस्टर की छात्रों को फाइनेंस में मिला शून्य 
  • एक माह आंदोलन चलाने के बाद फिर से यूनिवर्सिटी ने लिया एग्जाम
  • अक्टूबर 2012 में बीए के हिंदी पेपर में गल्र्स कॉलेज की छात्रा 200 छात्राएं हुई फेल 
  • लेना पड़ा आंदोलन का सहारा, पुनर्मूल्यांकन में कई हुई उत्तीर्ण 
  • पुनर्मूल्यांकन के लिए छात्र कई बार लगाते हैं एमडीयू का चक्कर             db

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