कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में सत्र 2012-13 में एमएड में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा दो दिसंबर को दोपहर 12 बजे से एक बजे तक होगी। रोल नंबर 12800001 से लेकर 12800300 तक कोड नंबर एमई-एक, यूआईईटी ब्लॉक-एक में, रोल नंबर 12800301 से लेकर 12800600 तक कोड नंबर एमई-दो यूआईईटी ब्लॉक-दो में, रोल नंबर 12800601 से लेकर 12800900 तक कोड नंबर एमई-तीन यूनिवर्सिटी कॉलेज ब्लॉक-एक में, रोल नंबर 12800901 से लेकर 12801200 तक कोड नंबर एमई-चार यूनिवर्सिटी कॉलेज ब्लॉक-दो में परीक्षा करवाई जाएगी। केयू के लोकसंपर्क विभाग के निदेशक प्रो. बृजेश साहनी ने बताया कि प्रवेश परीक्षा से संबंधित जानकारी केयू की वेबसाइट केयूके डॉट एसी डॉट इन पर उपलब्ध है।
Tuesday, 27 November 2012
3 हजार कर्मचारी 29 को देंगे गिरफ्तारियां
सर्व कर्मचारी संघ के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष शरबत सिंह पुनिया व उप महासचिव जीवन सिंह ने कहा है कि अंबाला जोन के तहत कैथल के विभिन्न विभागों के तीन हजार कर्मचारी 29 नवंबर को डीसी का घेराव करके गिरफ्तारियां देंगे। इस बारे में डीसी को प्रबंध करने के लिए जानकारी दे दी गई है। यह जानकारी उन्होंने सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दी। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में सवा लाख अस्थाई कर्मचारी हैं। जो विभिन्न विभागों में लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक प्रदेशभर से 22 सौ अस्थाई कर्मचारियों को ही स्थाई किया है।
सरकार अस्थाई कर्मचारियों का शोषण कर रही है। अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी आंदोलनों का रास्ता अपनाते हैं, लेकिन कर्मचारियों को मांगें पूरी करने का आश्वासन देकर चुप करवा दिया जाता है। ऐसा एक बार नहीं अनेक बार कर्मचारियों के साथ हुआ है। सरकार कर्मचारियों के साथ वादा खिलाफी कर रही है। सरकार ने दावा किया था कि अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई कर्मचारियों के पूरे वेतन का आधा वेतन दिया जाएगा, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ। कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां भी दूर नहीं की गई। अन्य राज्यों में कर्मचारियों के भत्ते और वेतन प्रदेश में कार्यरत कर्मचारियों से ज्यादा है। इस मौके पर जिला सचिव नरेश कुमार और ब्लाक सचिव जरनैल सिंह ने बताया कि सरकार प्रदेश में हर विभाग का निजीकरण कर रही है। सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं को भी प्राइवेट करने का भी मन बना रहा है। इन पांच जिलों में कैथल जिले का नाम भी शामिल है। कर्मचारियों की प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार की एक समान नीतियां हैं। उन्होंने कहा कि घेराव व गिरफ्तारियों का सिलसिला लंबा चलेगा। पांच दिसंबर को रोहतक जोन, 12 दिसंबर को गुडगांव जोन में भी घेराव व गिरफ्तारियां दी जाएंगी। अगर सरकार ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो वे 20 दिसंबर को संसद की ओर कूच करेंगे। अपनी मांगों को लेकर 20 और 21 फरवरी को देश भर के कर्मचारी हड़ताल और चक्का जाम करके अपना रोष प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रेस सचिव सतबीर गोयत, जसबीर, राजेश और प्रकाश गोयत भी उपस्थित थे।
सरकार अस्थाई कर्मचारियों का शोषण कर रही है। अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी आंदोलनों का रास्ता अपनाते हैं, लेकिन कर्मचारियों को मांगें पूरी करने का आश्वासन देकर चुप करवा दिया जाता है। ऐसा एक बार नहीं अनेक बार कर्मचारियों के साथ हुआ है। सरकार कर्मचारियों के साथ वादा खिलाफी कर रही है। सरकार ने दावा किया था कि अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई कर्मचारियों के पूरे वेतन का आधा वेतन दिया जाएगा, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ। कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां भी दूर नहीं की गई। अन्य राज्यों में कर्मचारियों के भत्ते और वेतन प्रदेश में कार्यरत कर्मचारियों से ज्यादा है। इस मौके पर जिला सचिव नरेश कुमार और ब्लाक सचिव जरनैल सिंह ने बताया कि सरकार प्रदेश में हर विभाग का निजीकरण कर रही है। सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं को भी प्राइवेट करने का भी मन बना रहा है। इन पांच जिलों में कैथल जिले का नाम भी शामिल है। कर्मचारियों की प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार की एक समान नीतियां हैं। उन्होंने कहा कि घेराव व गिरफ्तारियों का सिलसिला लंबा चलेगा। पांच दिसंबर को रोहतक जोन, 12 दिसंबर को गुडगांव जोन में भी घेराव व गिरफ्तारियां दी जाएंगी। अगर सरकार ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो वे 20 दिसंबर को संसद की ओर कूच करेंगे। अपनी मांगों को लेकर 20 और 21 फरवरी को देश भर के कर्मचारी हड़ताल और चक्का जाम करके अपना रोष प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रेस सचिव सतबीर गोयत, जसबीर, राजेश और प्रकाश गोयत भी उपस्थित थे।
Monday, 26 November 2012
रोहतक में गरजे 15 हजार शिक्षक
शिक्षा विभाग की अव्यावहारिक नीतियों से तंग आए प्रदेश के 15 हजार शिक्षकों ने रविवार को रोहतक में जबर्दस्त प्रदर्शन किया। इस 'आक्रोश रैली' में प्रदर्शनकारियों ने हुड्डा सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। इस प्रदर्शन के चलते रोहतक जिला प्रशासन की सांसें दिनभर अटकी रहीं। आला अधिकारियों से बात करने के बाद एसडीएम जगदीश शर्मा ने शिक्षक नेताओं को 27 नवंबर को उनकी चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक कराने का भरोसा दिया। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वजीर सिंह ने कहा कि उन्हें इस बैठक से कोई उम्मीद नहीं है और वह 20 दिसंबर को दिल्ली में संसद पर प्रदर्शन करने के बाद प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे।
शिक्षक नेताओं ने मंच पर पहुंचे अफसरों को नहीं सौंपा ज्ञापन
दोपहर 3.45 बजे एसडीएम जगदीश शर्मा और तहसीलदार प्रमोद चहल पुलिस अफसरों के साथ ज्ञापन लेने मंच पर पहुंचे तो शिक्षक नेताओं ने ज्ञापन देने से मना कर दिया। वह बोले, 'हमारी मांग है कि मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा विभाग की आयुक्त और प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक कब होगी, इसकी घोषणा की जाए' इसके बाद एसडीएम जगदीश शर्मा ने आला अफसरों से संपर्क साधा और करीब डेढ़ घंटे की ऊहापोह के बाद शाम 5.20 बजे बताया कि उनकी मुख्यमंत्री के साथ बैठक 27 नवंबर को होगी। इसके बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए।
आठ माह में कर चुके हैं पांच बार प्रदर्शन
> 28 अप्रैल २०१२ को सरकार के नए सेवा नियमों के विरुद्ध रोहतक में प्रदेशस्तरीय प्रदर्शन किया।
> 29 मई को झज्जर में शिक्षामंत्री के निवास के बाहर रैली की।
> 11 सितंबर को 21 जिलों से मांगपत्र जमाकर सीएम व शिक्षामंत्री को सौंपे।
> 13 अक्टूबर को पंचकूला में शिक्षा सदन का घेराव।
> 25 नवंबर को सरकार की नीतियों के विरुद्ध रोहतक में आक्रोश रैली।
ये हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
> रेशनेलाइजेशन नीति में संशोधन कर प्राथमिक कक्षा में 30, मिडिल में 35 और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में 40 बच्चों का सेक्शन बने।
> स्कूलों में प्राचार्य के 600, मुख्याध्यापक के 1400 और प्राध्यापकों के खाली पड़े 7500 पद पदोन्नति देकर भरे जाएं।
> अनुबंधित अध्यापकों, कंप्यूटर शिक्षकों और लैब सहायकों को नियमित किया जाए।
> अंतर जिला स्थानांतरण नीति में मेवात समेत सभी जिला कॉडर के शिक्षकों को शामिल किया जाए।
> हर कक्षा/सेक्शन के लिए अलग अध्यापक दिए जाएं।
> जेबीटी कोर्स में से इंटर्नशिप खत्म की जाए।
> शिक्षकों की छुट्टियां अन्य कर्मचारियों के बराबर हों।
> साल 2000 में लगे जेबीटी शिक्षकों को प्रमोट किया जाए।
> प्रमोशन का कोटा न्यूनतम 50 फीसदी रखा जाए।
> सरकारी स्कूलों का समय 9 बजे से 3 बजे तक हो।
प्रशासन ने दिया 27 को सीएम के साथ बैठक कराने का भरोसा
20 दिसंबर को संसद पर भरेंगे हुंकार
शिक्षक नेताओं ने मंच पर पहुंचे अफसरों को नहीं सौंपा ज्ञापन
दोपहर 3.45 बजे एसडीएम जगदीश शर्मा और तहसीलदार प्रमोद चहल पुलिस अफसरों के साथ ज्ञापन लेने मंच पर पहुंचे तो शिक्षक नेताओं ने ज्ञापन देने से मना कर दिया। वह बोले, 'हमारी मांग है कि मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा विभाग की आयुक्त और प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक कब होगी, इसकी घोषणा की जाए' इसके बाद एसडीएम जगदीश शर्मा ने आला अफसरों से संपर्क साधा और करीब डेढ़ घंटे की ऊहापोह के बाद शाम 5.20 बजे बताया कि उनकी मुख्यमंत्री के साथ बैठक 27 नवंबर को होगी। इसके बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए।
आठ माह में कर चुके हैं पांच बार प्रदर्शन
> 28 अप्रैल २०१२ को सरकार के नए सेवा नियमों के विरुद्ध रोहतक में प्रदेशस्तरीय प्रदर्शन किया।
> 29 मई को झज्जर में शिक्षामंत्री के निवास के बाहर रैली की।
> 11 सितंबर को 21 जिलों से मांगपत्र जमाकर सीएम व शिक्षामंत्री को सौंपे।
> 13 अक्टूबर को पंचकूला में शिक्षा सदन का घेराव।
> 25 नवंबर को सरकार की नीतियों के विरुद्ध रोहतक में आक्रोश रैली।
ये हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
> रेशनेलाइजेशन नीति में संशोधन कर प्राथमिक कक्षा में 30, मिडिल में 35 और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में 40 बच्चों का सेक्शन बने।
> स्कूलों में प्राचार्य के 600, मुख्याध्यापक के 1400 और प्राध्यापकों के खाली पड़े 7500 पद पदोन्नति देकर भरे जाएं।
> अनुबंधित अध्यापकों, कंप्यूटर शिक्षकों और लैब सहायकों को नियमित किया जाए।
> अंतर जिला स्थानांतरण नीति में मेवात समेत सभी जिला कॉडर के शिक्षकों को शामिल किया जाए।
> हर कक्षा/सेक्शन के लिए अलग अध्यापक दिए जाएं।
> जेबीटी कोर्स में से इंटर्नशिप खत्म की जाए।
> शिक्षकों की छुट्टियां अन्य कर्मचारियों के बराबर हों।
> साल 2000 में लगे जेबीटी शिक्षकों को प्रमोट किया जाए।
> प्रमोशन का कोटा न्यूनतम 50 फीसदी रखा जाए।
> सरकारी स्कूलों का समय 9 बजे से 3 बजे तक हो।
प्रशासन ने दिया 27 को सीएम के साथ बैठक कराने का भरोसा
20 दिसंबर को संसद पर भरेंगे हुंकार
वरिष्ठता पर मिलेगी मिडल हेड को प्रमोशन, ग्रेजुएशन अंक वाली शर्त लिया वापस
शिक्षा विभाग ने मिडल हेड की पदोन्नति के लिए स्नातक में अंक प्रतिशतता की शर्त को वापस ले लिया है। अब वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की जाएगी। इसके साथ ही मिडल हेड को संबंधित विषय के वर्क लोड से भी छूट दी गई है। इसी मामले को लेकर अध्यापकों और शिक्षा विभाग के बीच तनातनी चली हुई थी।विभाग की ओर से दी गई इस छूट से हजारों अध्यापकों को फायदा होगा।
शिक्षा विभाग ने हाल ही में मिडल हेड के पांच हजार से भी अधिक पदों को स्वीकृति दी है। इन्हें पदोन्नति के आधार पर भरा जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से पदोन्नति केस मांगे गए थे, लेकिन इसमें वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए अंक प्रतिशतता की शर्त रख दी गई थी। जिस पर अध्यापकों ने भारी रोष प्रकट किया था। हालांकि अध्यापकों के विरोध को देखते हुए विभाग ने अंक प्रतिशतता में पांच अंकों की छूट दे दी थी, मगर अध्यापक संगठन पूर्ण रूप से वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति की मांग कर रहे थी। इसी मुद्दे को लेकर पिछले दिनों अध्यापकों का एक शिष्टमंडल शिक्षा मंत्री से मिला था, जिसमें उन्हें आश्वासन दिया गया कि अब मिडल हेड के पद वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति करते हुए भरे जाएंगे।
विभाग ने मांगे आवेदन
इसी फैसले पर अब विभाग ने नए सिरे से आवेदन मांगे हैं। इसमें वे अध्यापक आवेदन कर सकेंगे, जो पहले अंकों के कारण आवेदन करने से वंचित रह गए थे। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बलजीत सिंह सहरावत बताते हैं कि सामान्य वर्ग में वरिष्ठता क्रमांक 4800 और अनुसूचित वर्ग में वरिष्ठता क्रमांक 6000 तक के अध्यापक अपने पदोन्नति केस तैयार करते हुए सोमवार को आवेदन जमा करा सकते हैं। नई वरिष्ठता सूची अगले सप्ताह तक विभागीय वेबसाइट पर डाल दी जाएगी।
इसी फैसले पर अब विभाग ने नए सिरे से आवेदन मांगे हैं। इसमें वे अध्यापक आवेदन कर सकेंगे, जो पहले अंकों के कारण आवेदन करने से वंचित रह गए थे। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बलजीत सिंह सहरावत बताते हैं कि सामान्य वर्ग में वरिष्ठता क्रमांक 4800 और अनुसूचित वर्ग में वरिष्ठता क्रमांक 6000 तक के अध्यापक अपने पदोन्नति केस तैयार करते हुए सोमवार को आवेदन जमा करा सकते हैं। नई वरिष्ठता सूची अगले सप्ताह तक विभागीय वेबसाइट पर डाल दी जाएगी।
अध्यापकों ने जताई खुशी
इसी मुद्दे को लेकर हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन की रविवार को क्रांतिमान पार्क में बैठक हुई। इसमें विभाग के फैसले पर खुशी प्रकट की गई। जिला प्रधान रोहताश छाछिया ने कहा कि इससे वंचित अध्यापकों के लिए पदोन्नति के रास्ते खुल गए हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर एलटीसी, कार लोन, हाउस बिल्डिंग अलाउंस और मेडिकल बिल जैसे मामले भी सुलझा दिए गए हैं। इससे अध्यापकों को काफी लाभ मिलेगा। इस मौके पर आर्य संजय, राजसिंह मलिक, जोगेंद्र सिंह मलिक, रमेश पूनिया, विनोद मोर, ईश्वर हुडा, सत्यनारायण सिवाच, विजेंद्र नैन, अजमेर सिंह, दलबीर सिंधू सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
इसी मुद्दे को लेकर हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन की रविवार को क्रांतिमान पार्क में बैठक हुई। इसमें विभाग के फैसले पर खुशी प्रकट की गई। जिला प्रधान रोहताश छाछिया ने कहा कि इससे वंचित अध्यापकों के लिए पदोन्नति के रास्ते खुल गए हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर एलटीसी, कार लोन, हाउस बिल्डिंग अलाउंस और मेडिकल बिल जैसे मामले भी सुलझा दिए गए हैं। इससे अध्यापकों को काफी लाभ मिलेगा। इस मौके पर आर्य संजय, राजसिंह मलिक, जोगेंद्र सिंह मलिक, रमेश पूनिया, विनोद मोर, ईश्वर हुडा, सत्यनारायण सिवाच, विजेंद्र नैन, अजमेर सिंह, दलबीर सिंधू सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
Sunday, 25 November 2012
फरवरी 2013 में होगा एचटेट
बलवान शर्मा, भिवानी
एक ओर जहां शिक्षा विभाग व शिक्षा बोर्ड प्रशासन इन दिनों स्टैट की ओएमआर सीट पर लगे अंगूठे के निशानों का मिलान उम्मीदवारों के निशान से करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने एक बार फिर से एचटेट (हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा) की तैयारियां शुरू कर दी हैं। शिक्षा बोर्ड ने एचटेट के लिए संभावित तिथि 2 व 3 फरवरी निर्धारित की है।
माना जा रहा है कि शिक्षा विभाग में की जा रही भर्तियों में शामिल होने का मौका इस परीक्षा में शामिल होने वालों को भी मिल सकेगा। ऐसे में प्रदेश के हजारों उम्मीदवारों के लिए यह एक अच्छी खबर है। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश सरकार ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड को एचटेट करवाने की हिदायत दे दी है। इसके तहत शिक्षा बोर्ड प्रशासन ने संभावित तिथि 2 व 3 फरवरी 2013 निर्धारित की है। क्योंकि इस बीच बोर्ड प्रशासन परीक्षाओं की तैयारियों को अंतिम रूप दे सकेगा। इधर बोर्ड प्रशासन ने अधिकारियों की बैठक बुला ली है।
आन लाइन कर सकेंगे आवेदन
इस बार शिक्षा बोर्ड प्रशासन ने उम्मीदवारों के आवेदन आन लाइन करवाने का फैसला किया है। बोर्ड ने पहले से ही इस संबंध में कंप्यूटराइजेशन को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया हुआ है। इसी के तहत इस बार एचटेट के आवेदन भी आन लाइन मांगे जाएंगे।
Saturday, 24 November 2012
8706 जेबीटी टीचरों की भर्ती पर खतरा
प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2010 में हुई 8706 जेबीटी अध्यापकों की भर्ती पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर कराई गई जांच में 54 स्टैट पास धारकों में से 21 उम्मीदवारों के अंगूठे के निशान का मिलान नहीं हुआ है। इस चौंकाने वाले रिजल्ट ने स्टेट मामले की जांच में तेजी ला दी है। हाई कोर्ट ने प्रदेश के सभी स्टेट पास पात्रों के अंगूठे के निशान की जांच के आदेश दे दिए हैं।
शुक्रवार को शिक्षा बोर्ड मुख्यालय में फोरेंसिक लैब मधुबन की टीम को लेकर शिक्षा निदेशालय के अधिकारी पहुंच गए हैं। प्रथम चरण में भिवानी के उम्मीदवारों के अंगूठे के निशान की जांच होगी। इसके बाद अन्य जिलों के उम्मीदवारों को संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी लेकर भिवानी पहुंचेंगे।
प्रवीण कुमारी बनाम हरियाणा सरकार के केस में हाई कोर्ट के आदेश पर शिक्षा विभाग ने 54 उम्मीदवारों के अंगूठे के निशानों का मिलान कराया था। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि फोरेसिंक जांच टीम ने अगस्त 2012 में इसकी रिपोर्ट सौंप दी। इसमें पाया है कि 54 में से 21 उम्मीदवारों के अंगूठे के निशान नहीं मिले हैं। इस रिपोर्ट से जाहिर है कि स्टेट परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बैठे थे। केवल 8 उम्मीदवारों के अंगूठे के निशान ही सही पाए गए। शेष 25 उम्मीदवारों का पूरा रिकार्ड न होने के कारण रिजल्ट पेंडिंग है। इस रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट ने मौलिक शिक्षा निदेशालय को सभी स्टैट पास की जांच के आदेश दे दिए हैं।
तीन माह तक जांच का अनुमान
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने 2008 में एक बार और 2009 में दो बार स्टैट की परीक्षा संचालित कराई थी। अब हाईकोर्ट के आदेश पर तीनों ही परीक्षाओं में पास उम्मीदवारों के अंगूठों के निशान मिलाए जाएंगे।
प्रथम चरण में भिवानी जिले के उम्मीदवारों के अंगूठे के निशान की जांच शुरू की गई है। यह जांच लगभग तीन माह तक चलने का अनुमान है। अधिवक्ता जसवीर मोर ने कहा कि शिक्षा बोर्ड के प्रोस्पेक्टस के अनुसार अंगूठे के निशान लिए जाने थे, लेकिन बोर्ड ने अंगूठे के निशान लिए ही नहीं। दिसंबर 2010 में कविता कुमारी के नाम से याचिका डाली थी। कोर्ट ने मौलिक शिक्षा निदेशक को जांच के आदेश दिए थे और चार माह में रिपोर्ट देने को कहा। रिपोर्ट नहीं दी गई। इसके बाद सीडब्ल्यूपी 3 आफ 2011 प्रवीण कुमारी एंड अदर्स वर्सिज स्टेट आफ हरियाणा याचिका डाली गई। इस याचिका में बताया गया कि बिना जांच के ही हरियाणा सरकार ने 8706 जेबीटी अध्यापकों को नियुक्तियां दे दी हैं। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को एक लाख रुपये की सुरक्षा राशि के आधार पर जांच के आदेश दिए।
Friday, 23 November 2012
प्राध्यापकों ने पदोन्नति में मांगा शत-प्रतिशत कोटा
हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) ने नए त्रिस्तरीय ढांचे, प्रधानाचार्य एवं उप प्रधानाचार्य पदों की पदोन्नति में अपना शत प्रतिशत दावा पेश किया है। हसला प्रदेशाध्यक्ष किताब सिंह मोर व प्रांतीय महासचिव दलबीर पंघाल ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि जब प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग शिक्षा में गुणात्मक सुधार के उद्देश्य से 9 से 12 तक की कक्षाएं प्राध्यापकों से पढ़वाना चाहते हैं तो प्रिंसिपल व वाइस प्रिंसिपल के पदों पर पदोन्नति का शत प्रतिशत अधिकार भी केवल प्राध्यापकों का ही बनता है
Source:PunjabKesri,23.11.12
Source:PunjabKesri,23.11.12
प्रदेश में बनेगी 20176 मास्टरों की वरीयता सूची
प्रदेश में जल्द ही करीब 20,176 मास्टरों की वरीयता सूची तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर 5548 पदों पर मास्टरों को मिडिल स्कूल हेड मास्टर के पदों पर पदोन्नत किया जाएगा। मौलिक शिक्षा निदेशक डा. अभय सिंह यादव ने हरियाणा मास्टर वर्ग एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को यह जानकारी दी है।
पीटीआई टीचर्स को राहत
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 2010 में भर्ती किए गए पीटीआई टीचर की हाईकोर्ट की सिंगल बैंच द्वारा नियुक्ति रद करने के खिलाफ पीटीआई टीचर व हरियाणा सरकार की अपील पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एके सिकरी की खंडपीठ ने इस मामले में अपील करने वाले पक्ष को कहा है कि वह इस मामले में एकल बैंच में याचिका दायर करने वाले सभी याचिकाकर्ता को प्रतिवादी बनाए। हाईकोर्ट इस मामले में एकल बैंच में याचिका दायर करने वाले सभी 68 याचिकाकर्ता का पक्ष सुनने के बाद अपना निर्णय देगा। इसी के साथ खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई 18 दिसंबर के लिए स्थगित कर दी। मामले की अगली सुनवाई तक पीटीआई टीचरों पर यथास्थिति बनी रहेगी। इस मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की तरफ से एकल बैंच के फैसले को गलत ठहराते हुए डिविजन बैंच से इस पर रोक लगाने की मांग की गई है। पीटीआई की तरफ से कहा गया कि एकल बैंच ने उनका पक्ष सुने बगैर की इतना बड़ा फैसला सुना दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने एकल बैंच द्वारा उसी टिप्पणी पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि यह भर्ती एक व्यक्ति के इशारे पर की गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दो लोगो को मानसिक रूप से परेशान करने पर हुडा को 15 लाख रुपये व दोषी एस्टेट आफिसर को दो लाख का जुर्माना लगाते हुए यह राशी पीर्डित को देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह आदेश पानीपत निवासी परमीदंर व कुलवींद्र द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। इस मामले में हुडा ने परमींद्र की जमीन का एक्वायर करे बगैर उसको कुलवींद्र को अलाट कर दी। हुडा के इस कदम से दोनो पक्ष मानसिक रूप से परेशान थे। हाईकोर्ट ने हुडा को दस लाख रूपये परमींद्र कके व पांच लाख रूपये कुलवींद्र को देने का आदेश दिया। जिन अधिकारियों की गलती से यह हुआ कोर्ट ने उन अधिकारियों को भी दो लाख का जुर्माना लगाते हुए यह राशी परमींद्र को देने का आदेश दिया। पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 सितंबर को हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा नियुक्ति किए गए 1983 पीटीआई टीचरों की नियुक्ति को रद कर दिया था। हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन क मीशन ने 10 अप्रैल 2010 को फाइनल सेलेक्शन लिस्ट जारी कर ये नियुक्तियां की थी। हाईकोर्ट ने कमीशन को निर्देश जारी किए थे कि आयोग नियमों के तहत नए सिरे से भरती शुरू करे और पांच महीने के अंदर इस भरती प्रRिया को पूरा कर लिया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान साक्षात्कार होल्ड करवाने वाले आयोग की सेलेक्शन कमेटी के सदस्यों द्वारा कार्यवाहियों में शामिल न होने से आयोग की नाकारात्मक छवि को उजागर करता है। हाईकोर्ट ने कहा कि दस्तावेज खुलासा करते हुए एक बिंदु की तरफ इशारा करते हैं कि यह नियुक्तियां आयोग के निर्धारित नियमों के तहत नहीं हुई है और इन्हें गैरकानूनी कहलाना गलत नहीं है। खंडपीठ ने इस मामले में कमीशन के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते यह तक कहा कि बहुसदस्यीय कमीशन होने के बाद भी कार्यप्रणाली से ऐसा लगता है कि यह सब एक व्यक्ति के कहने से चल रहा है। कोर्ट ने कमीशन के चेयरमैन व सदस्यों पर भी टिप्पणी की।Source:HariBhoomi,23.11.12
अध्यापकों की टेनिंग पर अधिक जोर
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्कूल शिक्षा में अधिक गुणात्मक सुधार के लिए अध्यापक प्रशिक्षण को ज्यादा मजबूत बनाने पर जोर दिया है। इसके लिए उन्होंने अलग से अध्यापक प्रशिक्षण विशेषज्ञों की सेवा की आवश्यकता पर बल दिया है।
मुख्यमंत्री बृहस्पतिवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यापक प्रशिक्षण के लिए विशेषज्ञों की अलग से पहचान की जाए तथा उनका कार्य केवल अध्यापक प्रशिक्षण का ही होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्कूलों में जिला शिक्षा अधिकारियों तथा निदेशालय स्तर पर निरीक्षण करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अध्यापक प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई जाए। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव सुरीना राजन ने अवगत करवाया कि अध्यापकों को प्रशिक्षण की वर्तमान व्यवस्था से अवगत कराया। स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए।
Source:Dainik Jagran,23.11.12
Thursday, 22 November 2012
नियम बदले जाने से हजारों पीएचडी धारकों का भविष्य अधर में
हरियाणा सरकार ने उच्चतर शिक्षा सेवा नियम 2010 में परिवर्तन कर हजारों पीएचडी धारकों के लिए कॉलेज स्तर पर सहायता प्रवक्ता के पद पर नौकरी के दरवाजे बंद कर दिए हैं।
सरकार ने उच्चतर सेवा नियम 2010 के अनुसार निजी विश्वविद्यालय से पीएचडी धारक अपात्र घोषित कर दिए गए हैं। केवल उन्हीं पीएचडी धारकों को नेट परीक्षा से छूट होगी, जिन्होंने राज्य या केंद्र विश्वविद्यालय या वैसे निजी विश्वविद्यालय पीएचडी हासिल की जो कि नेक से ए ग्रेड है। सरकार की इस नीति से हजारों युवाओं को भविष्य अंधकार में डूब गया है। निजी विश्वविद्यालय से पीएचडी के पढ़ाई कर चुके राजेंद्र का कहना है कि हरियाणा का एक भी निजी विश्वविद्यालय नेक से ग्रेडिड नहीं है। यहां तक की सरकारी विश्वविद्यालय चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा जो 2003 में बनी थी व बीपीएस विश्वविद्यालय खानपूर भी नेक से ग्रेडिड नहीं है। कॉलेज ओर विश्वविद्यालय की नेट से निरीक्षण का कार्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तय करता है। इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कॉलेज या विश्वविद्यालय को मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के लिए पांच या सात साल का समय देता है।
किसी भी विश्वविद्यालय को खुलते ही नेक से निरीक्षण नहीं होता क्योंकि विश्वविद्यालय को विकसित होने में कुछ समय तो लगता ही है। जब हरियाणा सरकार को निजी विश्वविद्यालय की डिग्री अमान्य करनी है तो उसने प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति दी ही क्यों है। बेरोजगार युवा काफी कठिनाइयों से फीस भरकर निजी व अन्य विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण करके डिग्री प्राप्त करते हैं और सरकार उसे अमान्य घोषित कर देती है। पढ़े लिखे बेरोजगार युवा ने सरकार से मांग की कि इस तरह की शिक्षा विरोधी नीति को जल्द वापस लिया जाए।
Source: Dainik Jagran,22.11.12
Wednesday, 21 November 2012
Monday, 19 November 2012
जेबीटी भर्ती में बीएड पास भी कर सकेंगे आवेदन!
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़, Daink Jagran,19.11.12
बीएड पास उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। अगर हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश को सरकार लागू करती है तो हजारों बीएड पास अभ्यर्थी वर्तमान में निकाले गए जेबीटी के 8763 पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे। वैसे इसका सीधा-सीधा नुकसान जेबीटी पास उम्मीदवारों को होगा।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व हरियाणा विद्यालय शिक्षक चयन बोर्ड को आदेश दिया है कि वह बीएड पास याचिकाकर्ता उम्मीदवार को जेबीटी के लिए प्रोविजनल तौर पर योग्य माने व उसे भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने दे। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एके सिकरी पर आधारित खंडपीठ ने कैथल निवासी सुमन बाला व अन्य द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी। साथ ही हाई कोर्ट ने इस मामले में हरियाणा सरकार को 30 नवंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील राजेश बंसल ने हाई कोर्ट से मांग की कि वह हरियाणा विद्यालय शिक्षक चयन बोर्ड द्वारा 8 नवंबर को निकाले गए उस विज्ञापन को रद करे जिसमें बोर्ड ने 8763 जेबीटी टीचरों की भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। बंसल ने कोर्ट को बताया कि इस भर्ती में बीएड पास उम्मीदवार को जेबीटी टीचर के लिए आवेदन करने के योग्य नहीं माना गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि हरियाणा सरकार ने 23 अगस्त 2010 को एक अधिसूचना जारी कर बीएड पास उम्मीदवार को जेबीटी टीचर के लिए योग्य माना था। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वह बीएड एवं जेबीटी के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा पास कर चुका है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार का यह कदम गैर कानूनी है और इस भर्ती पर रोक लगाई जानी चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को प्रोविजनल तौर पर जेबीटी भर्ती में भाग लेने दे।





