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Saturday, 14 December 2013

प्रदेश में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ

** व्यक्गित लाभ के लिए याचिका मान्य नहीं : कोर्ट
** रिजल्ट घोषित करने पर लगी रोक हटी 
चंडीगढ़ : प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इन भर्तियों के नतीजे घोषित करने पर लगी रोक हटा दी। हरियाणा स्कूल टीचर्स सिलेक्शन बोर्ड के गठन को खारिज करने की मांग को लेकर एक याचिका लगाई गई थी। इसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। चीफ जस्टिस संजय किशन कौल व जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने कहा कि जनहित याचिका में निजी हित जुड़े हैं। खंडपीठ ने याचिका लगाने वाले विजय बंसल पर 25 हजार का जुर्माना भी लगाया। यह रकम उन्हें दो सप्ताह में हाईकोर्ट के मीडिएशन एंड कोंसिलेशन सेंटर में जमा कराना है। 
याचिकाकर्ता ने कहा- फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करूंगा 
टीचर भर्ती के लिए साक्षात्कार अगस्त, 2012 में शुरू हो गए थे। इसके बाद मैथ, पंजाबी, भौतिक और रसायनविज्ञान सहित १० विषयों के प्राध्यापकों की लिस्ट भी भर्ती बोर्ड ने लगा दी थी। अप्रैल, 2013 को हाईकोर्ट ने प्राध्यापकों की ड्यूटी ज्वाइनिंग व नई सूची जारी करने पर रोक लगा दी। 10 सितंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि बंसल का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। 
यह कहा गया था याचिका में
पिंजौर निवासी बंसल ने बोर्ड को खारिज करने की मांग की थी। उन्होंने याचिका में कहा कि बोर्ड का गठन अनुचित ढंग से किया गया है। बोर्ड द्वारा की जाने वाली सभी भर्तियों पर रोक लगाई जाए। आरोप लगाया गया था कि बोर्ड के चेयरमैन नंद लाल पूनियां मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी रिश्तेदार हैं। इसके अलावा बोर्ड के सदस्य जगदीश प्रसाद मुख्य संसदीय सचिव राव दान सिंह के भाई हैं। एक अन्य सदस्य त्रिभुवन प्रसाद बोस मुख्यमंत्री के बेटे के शिक्षक रहे हैं। चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर बोर्ड के चेयरमैन व सदस्यों की रिटायरमेंट आयु 72 वर्ष कर दी गई। 
सरकार को भी नसीहत 
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बोर्ड के चेयरमैन की भूमिका विवादों में रही है। इससे पहले फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर (पीटीआई) भर्ती के दौरान भी उनकी भूमिका पर सवाल उठे थे और हाईकोर्ट के एकल जज ने उनके कामकाज पर तल्ख टिप्पणी कर उनकी कार्यशैली की आलोचना की थी। ऐसे में उन्हें पद पर बनाए रखने को लेकर राज्य सरकार को गंभीरता से फैसला करना चाहिए। बेंच उम्मीद करती है कि राज्य सरकार खुद ही इस मामले में एक तय समय सीमा में जरूरी कार्रवाई करेगी। 
बेंच ने अपने 42 पेज के फैसले में कहा कि विजय बंसल ने राजनीतिक लाभ के लिए ज्युडीशियल फोरम का सहारा लिया। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। बंसल ने सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी छोड़ी और वर्ष 2009 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। 2011 में उसने इनेलो का दामन थाम लिया। बंसल के बयान और तस्वीरें जाहिर करती हैं कि वे याचिका के जरिए राजनीतिक स्वार्थ साधने का प्रयास कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि चेयरमैन व सदस्यों की रिटायरमेंट आयु बढ़ाना, सरकार का पॉलिसी मैटर है। इसमें अदालत का दखल जरूरी नहीं।                      db


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