** लापरवाह अफसरों-कर्मचारियों पर 250 से 5000 रुपए तक प्रतिदिन जुर्माने का प्रावधान
चंडीगढ़ : बिना वाजिब कारण के पब्लिक का काम लटकाने वाले अफसरों व कर्मचारियों को 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना होगा। जुर्माने की यह राशि अधिकतम 5000 रुपए होगी। राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को 'हरियाणा सेवा अधिकार अध्यादेश 2013' को अपनी मंजूरी दे दी। इसके तहत अब जनसेवाओं को तय समय में निपटाना होगा।
इसके साथ ही कैबिनेट ने पुलिस व जेल कर्मियों को जोखिम भत्ता देने, 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से पहले श्रेणी 3 व 4 कर्मियों को 2000 रुपए मासिक अंतरिम राहत देने सहित गोहाना रैली में की गई कई घोषणाओं को मंजूरी दे दी। सीएम भूपेंद्रसिंह हुड्डा ने मीडिया को बताया कि कुछ अन्य घोषणाओं पर चर्चा हुई है, लेकिन उन पर 18 दिसंबर को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में फैसले लिए जाएंगे।
आम आदमी को होगा अब ये अधिकार
सेवा चाहने वाले व्यक्तिको आवेदन देना होगा। इस पर संबंधित अफसर-कर्मी को तय अवधि में फैसला लेना होगा। असंतुष्ट आवेदक 30 दिन में पहली और अगले 30 दिन में दूसरी अपील दायर कर सकेगा। अगर कोई अधिकारी बिना किसी वाजिब कारणों के सेवा देने में असफल रहता है, उस पर 250 से 5000 रु. तक जुर्माना लगेगा। दूसरी अपील पर शिकायत निवारण अधिकारी आवेदक को 1000 रु. के मुआवजे के आदेश भी जारी कर सकता है।
पहले चरण में 36 सेवाओं पर लागू होगा एक्ट
सीएम ने बताया कि राइट टू सर्विस एक्ट में पहले चरण में 36 सेवाओं को सम्मिलित किया जाएगा। एक शिकायत निवारण प्राधिकरण भी बनाया जाएगा। अध्यादेश के नोटिफिकेशन और प्राधिकरण बनने के साथ ही यह एक्ट लागू हो जाएगा। इसे ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार एक आयोग स्थापित करेगी। आयोग की सिफारिशों को समय समय पर लागू किया जाएगा। db
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