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Saturday, 7 December 2013

अफसरों ने दबा दी 'किताब में देरी केस' के आरोपी की फाइल, मंत्री भी बेखबर

** सर्वशिक्षा अभियान के तहत मांगी थी फाइल, अफसरों की नीयत पर संदेह 
चंडीगढ़ : सर्वशिक्षा अभियान के तहत किताबों की डिलिवरी में किस-किस अफसर की लापरवाही रही, यह फाइल शिक्षा विभाग ने दबा ली। 
आलम यह है कि मंत्री के बारबार कहने पर भी फाइल उन तक नहीं पहुंच रही है। मंत्री को यह तक नहीं बताया जा रहा है कि कोई कार्रवाई हुई भी या नहीं। यदि हुई तो किस-किस अधिकारी के खिलाफ क्या क्या कार्रवाई हुई। तीन माह पहले मांगी थी फाइल अभी तक नहीं आई : 
शिक्षा मंत्री ने एलीमेंट्री एजुकेशन के डायरेक्टर डी सुरेश से यह फाइल तीन माह पहले मांगी थी। उन्होंने शुक्रवार को बताया कि फाइल शिक्षा विभाग के निदेशक चंद्रशेखर के पास पहुंची है। मामला यह है कि अफसर खुद नहीं चाह रहे कि यह फाइल आगे चले। यहीं वजह है कि फाइल को रोकने के हर संभव प्रयास हो रहे हैं। 
फंस सकते हैं कई अफसर : 
इस बार सर्वशिक्षा विभाग के तहत बच्चों को दी जाने वाली सितंबर तक भी नहीं पहुंची थी। इस वजह से शिक्षा विभाग को शॉर्ट टर्म टेंडर करने पड़े। तब जाकर बच्चों को किताब मिलीं। पहले किताबों के टेंडर मुंबई की फर्म को दिए गए थे क्योंकि अफसरों की जिम्मेदारी थी कि वे किताबों की छपाई के काम की देखरेख करेंगे। 
यह तय करेंगे कि किताब समय पर प्रकाशित हो रही है। लेकिन कई अफसरों ने अपनी ड्यूटी सही तरह से नहीं निभाई। इसमें बोर्ड से लेकर विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे थे। शिक्षा मंत्री ने बताया कि कमेटी बना कर यह तय करने के लिए कहा गया था कि आखिर क्यों किताब में देरी हुई। इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं। 
गड़बड़ी की आशंका इसलिए 
किताबें छपवाने का काम अगस्त-2012 में शुरू हुआ। टेंडर हाईपावर कमेटी के जरिए किए गए। टेंडर फाइनल करने और वर्कऑर्डर देने में ही तीन महीने लगा दिए। नतीजा, अक्टूबर-2012 में वर्क ऑर्डर दिए जा सके। यह प्रक्रिया इसलिए की गई कि समय पर बच्चों को किताब मिल सके। किताब इस साल मार्च तक पहुंच जानी थीं। लेकिन जब किताब नहीं पहुंची तो ठेका लेने वाली कंपनी का टेंडर रद्द कर शॉर्ट टर्म टेंडर कराए गए। इसके बाद ही बच्चों को किताब मिल पाई। जिससे स्कूलों में पढ़ाई बाधित हुई।
शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल से सीधी बात 
अभी तक फाइल आप तक क्यों नहीं पहुंची? 
अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है, एक-दो दिन में फाइल आ जाएगी। 
क्या कोई कार्रवाई हुई? 
लगता तो नहीं क्योंकि अधिकारियों ने अपने स्तर पर कार्रवाई की नहीं। उनके पास कार्रवाई की फाइल आई नहीं। इसलिए कार्रवाई तो नहीं हुई। 
आपको नहीं लगता अधिकारी मामला दबाने की कोशिश कर रहे हैं? 
नहीं ऐसा नहीं है। कार्रवाई तो होकर रहेगी। मामला सीएम के संज्ञान में भी है। हमारी कोशिश है कि असली आरोपी तक पहुंचा जाए।                 db




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