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Sunday, 20 July 2014

लंबे संघर्ष के बाद सरकार ने मानीं शिक्षकों की मांगें

लंबे संघर्ष के बाद प्राथमिक शिक्षकों की बात सरकार ने मान ली है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान तरुण सुहाग ने बताया कि सरकार ने मुख्य शिक्षकों का प्रमोशन, एपीसीआर में संशोधन, मुख्य शिक्षकों को सभी अधिकार, अलग कैंपस का विलय नहीं करना तथा स्थानांतरण नीति का संशोधन किया जाना सहित कई मांगों को मान लिया है। इससे शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। इसे लेकर संघ के नेता पंचकूला में प्रदर्शन कर रहे थे। 
कई दिनों से राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले हरियाणा राज्य के हजारों प्राथमिक शिक्षकों ने 15 जुलाई को शिक्षा सदन पंचकूला का घेराव किया। शिक्षा निदेशक ने मांगों पर सहमति बनाने के लिए वार्ता के लिए बुलाया है। गुडग़ांव के जिला महासचिव अशोक कुमार ने बताया कि मांगों पर सहमति बनने पर राज्य प्रधान विनोद ठाकरान ने आमरण अनशन की घोषणा की थी। अनशन में बाधा डालते हुए 16 जुलाई को पुलिस ने अपनी बर्बता दिखाते हुए प्राथमिक शिक्षकों को गिरफ्तार कर उन्हें वीरान जगह पर ले जाकर छोड़ दिया। इसके बाद शिक्षा सदन के आस-पास धारा 144 लगा दी गई। जहां शिक्षकों को छोड़ा वहां किसी प्रकार की मूलभूत सुविधा नहीं थी। अनशन के लिए उपयुक्त स्थान पाने के लिए शिक्षकों का एक दल उपायुक्त कार्यालय पंचकूला में भी गया। वहां भी निराशा हाथ लगी। 
राज्य प्रधान उसी स्थान पर आमरण अनशन पर बैठे रहे। राज्य प्रधान ने सरकार की इस बर्बरता लापरवाही के विरोध स्वरूप 18 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा कर दी। इस घोषणा के बाद प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने संघ के सदस्यों को वार्ता के लिए पुन: बुलाया है। वार्ता के दौरान शिक्षकों की 6 में से 4 मांगों पर सहमति बनी। 17 जुलाई शाम 5 बजे सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा राज्य प्रधान को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया गया तथा जारी किए गए पत्र सौंपे गए।                     dbgrgn

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