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Monday, 17 February 2014

हाईकोर्ट : साल के अंत तक नियुक्त हों प्राध्यापक, बढ़ेंगी गेस्ट लेक्चरर की मुश्किलें

** हाईकोर्ट ने सरकार को दिए आदेश, बढ़ेंगी गेस्ट लेक्चरर की मुश्किलें
चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 31 दिसंबर से पहले सरकारी कॉलेजों में स्थायी सहायक प्राध्यापक नियुक्त करने के आदेश दिए हैं। अब लोक सेवा आयोग को 1396 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया नवंबर के दूसरे सप्ताह तक हर हाल में पूरी करनी होगी। इससे विभिन्न कालेजों में सेवाएं दे रहे सैकड़ों अतिथि प्राध्यापकों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।   
जस्टिस एजी मसीह ने सिरसा निवासी राकेश कुमार की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश जारी किए। हरियाणा लोक सेवा आयोग ने कोर्ट में दायर अपने जवाब में बताया था कि 1396 सहायक प्राध्यापक की भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सात से आठ महीने के भीतर इसे पूरा कर लिया जाएगा। जस्टिस मसीह की बैंच ने लोक सेवा आयोग को आदेश दिया कि वह 15 नवंबर तक प्रक्रिया पूरी कर सरकार को चयनित उम्मीदवारों के नाम की सिफारिश सौंप दे। सरकार उन उम्मीदवारों को 31 दिसंबर तक नियुक्ति दे। 
हाईकोर्ट के इस आदेश से सरकार के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो सकती है। जहां स्कूलों में कार्यरत पंद्रह हजार से अधिक अतिथि अध्यापक नियमित होने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। इस आदेश से नियमित भर्ती के कारण कॉलेजों में कार्यरत सैकड़ों अतिथि प्राध्यापकों को हटाना पड़ेगा।
क्या था मामला 
राकेश कुमार ने याचिका दायर कर कॉलेजों में प्राध्यापकों के खाली पड़े पद भरने की मांग की थी। याचिका के अनुसार प्रदेश के कालेजों में लगभग 500 से अधिक अतिथि प्राध्यापक कार्यरत हैं, जो 2007 से सरकार द्वारा स्वीकृत पदों पर काम कर रहे हैं। 2007 में सरकार ने एक नीति के तहत कॉलेज प्रमुखों को निर्देश जारी कर अतिथि प्राध्यापक रखने की इजाजत दी थी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि गेस्ट और ठेके पर किसी भी विभाग में कोई नियुक्ति अगर होती है तो वह छह माह से अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसा भी किसी विशेष कारण पर ही हो सकता है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सरकार अतिथि प्राध्यापकों को नियमित करने की योजना बना रही है, जबकि इनकी नियुक्ति बगैर किसी नियम व विज्ञापन प्रकाशन के कालेज मुखिया द्वारा की गई है। इसलिए यह बैक डोर एंट्री है। इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट फैसले दे चुका है कि नियमित पोस्ट पर बैक डोर से नियुक्ति असंवैधानिक है।                                                   dj

1 comment:

Rakesh kumar saini said...

Why it is for college guest lecturer and why not for guest teachers. That is not justic.

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