चंडीगढ़ : हरियाणा में प्राथमिक शिक्षकों की भर्तियां हमेशा से विवादों में रही हैं, चाहे वे किसी भी सरकार के कार्यकाल की हों। इन भर्तियों के तौर-तरीके पर सवाल उठते रहे हैं। कभी शिक्षकों को अदालत का सहारा लेना पड़ा तो कभी नौकरी बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी है। फिलहाल भी पिछली भर्तियां जांच के दायरे में चल रही हैं। इनेलो के शासनकाल में 2000 में 3206 प्राथमिक शिक्षकों की जो भर्ती हुई थी, उसे लेकर अब करीब 14 साल बाद फैसला आया है और यह फैसला भी इन शिक्षकों के प्रतिकूल है। जुलाई 2004 और दिसंबर 2004 में करीब 6500 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती हुई थी, जिन्हें जिला परिषदों के अंतर्गत लगाया गया था। तब भी भर्ती को लेकर काफी विवाद हुआ था। इन शिक्षकों को पहले तीन साल (पहले साल पांच हजार, दूसरे साल छह हजार और तीसरे साल सात हजार) वेतनमान देने के बाद पूरा स्केल देने की बात कही गई थी। उसी समय विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार आई। कांग्रेस के शासनकाल में इस भर्ती पर सवालिया निशान लग गया था तथा इन शिक्षकों का विभागीय टेस्ट रख दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 10-8-2005 को तत्कालीन सरकार ने इन 6500 शिक्षकों को शिक्षा विभाग में समायोजित कर दिया गया। वर्ष 2008 में 3200 शिक्षकों की भर्ती की गई। तुरंत बाद सरकार ने एचटेट परीक्षा रख दी, जो पात्र अध्यापक एचटेट किए हुए थे, उनमें से 8400 अध्यापकों को प्राथमिक शिक्षक के तौर पर नियुक्तियां दी गई। अब इन शिक्षकों का मामला आज भी हाईकोर्ट में थंब इंप्रेशन (अंगूठा जांच) को लेकर चल रहा है। ऐसे में साफ कहा जा सकता है कि राज्य में प्राथमिक शिक्षकों की भर्तियों को लेकर विवाद ही रहा है। dj
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