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Wednesday, 4 March 2015

15 दिन के अंदर देना होगा अंगूठे का निशान

** पात्रता परीक्षा में धांधली करने का खुलासा होने पर शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को दिया नोटिस, कुछ ने छोड़ी नौकरी 
गोहाना : मधुबन फोरेंसिस लैब की रिपोर्ट में जेबीटी शिक्षकों की पात्रता परीक्षा में धांधली करने का खुलासा होने के बाद शिक्षा विभाग ने ऐसे टीचरों के खिलाफ कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने टीचरों को नोटिस देकर 15 दिन के अंदर अपना पक्ष रखने का एक मौका दिया है। कोई टीचर यदि कार्यालय में अपना पक्ष नहीं रखता है तो केवल उन्हें निलंबित किया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज कराया जाएगा। ऐसे टीचरों की संख्या दस है। वहीं 21 ऐसे टीचरों को भी नोटिस जारी किया है, जो नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। 
पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान खाली पड़े जेबीटी पदों को भरने के लिए जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। नियुक्ति के बाद शिक्षकों की पात्रता पर सवाल खड़े कर दिए थे। इस बारे में कोर्ट में याचिका भी दायर की थी। जिसमें याचिका में कहा गया कि शिक्षा बोर्ड ने अध्यापक पात्रता परीक्षा (स्टेट) का आयोजन किया था। इसके लिए जारी प्रोस्पेक्टस में साफ लिखा था कि परीक्षा की उत्तरपुस्तिका पर अंगूठे के निशान फार्म पर लिए अंगूठे के निशान का मिलान करने के बाद ही प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। परंतु बाद में जांच किए बिना ही प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। परीक्षा में कई छात्रों ने अपनी जगह दूसरे को बैठाकर परीक्षा पास की है। जिस पर कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। 
नौकरी छोड़ चुके शिक्षकों को भी देना होगा अंगूठा का निशान: 
नियुक्ति के बाद कुछ शिक्षकों ने रिजाइन कर दिया और अब दूसरे विभागों में कार्यरत है। ऐसे शिक्षकों के अंगूठे के निशान विभाग के पास नहीं हंै। पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर विभाग ने ऐसे कर्मचारियों को नोटिस जारी करके कार्यालय में आकर अंगूठे का निशान देने को कहा है, जिससे उनकी भी जांच कराई जा सके।
"कोर्ट के आदेश पर 31 जेबीटी शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें 10 शिक्षक कार्यरत है और 21 शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने नियमानुसार रिजाइन किया था। कोर्ट के आदेश पर उन कर्मचारियों के अंगूठे के निशान लिए जाएंगे। नोटिस के बाद भी यदि कोई शिक्षक अपना पक्ष या अंगूठा का निशान नहीं देता है तो विभाग के आदेशानुसार कार्रवाई की जाएगी।''-- ओपीकाद्यान, डीईईओ 
यह था पूरा मामला 
2011 में शिक्षकों के 8285 पदों पर हुई भर्ती में नियमों की पालना होने और गलत तरीके से शिक्षक बनने वालों की नियुक्ति रद्द करने की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। इस संदर्भ में हरियाणा सरकार की तरफ से कोर्ट में शपथ पत्र दायर किया था। जिसमें कहा गया था कि 2011 में नियुक्ति पाने वाले जेबीटी शिक्षकों की अध्यापक पात्रता परीक्षा पास करने के रिकार्ड की सीएफएसएल जांच में पाया गया कि केवल 1101 टीचरों ने सही तरीके से परीक्षा पास की है। 7150 में से 798 शिक्षकों को पूरी तरह से फर्जी करार दिया था। शेष 6049 शिक्षकों की पात्रता पर संदेह की बात कही गई।                                                                                                            db

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